नौकरियों में प्रदेश के युवाओं को ज्यादा मौके देने कानून बनाएगी सरकार: कमलनाथ

भोपाल। प्रदेश के लोगों को रोजगार के ज्यादा से ज्यादा मौके उपलब्ध कराने के लिए सरकार कानून बनाएगी। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को सदन में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में 70 प्रतिशत रोजगार स्थानीय नौजवानों को मिले, इसके लिए शपथ लेने के बाद ही आदेश कर दिए थे। हमारे लिए भी यह चिंता का विषय है कि बाहर के बच्चों को ज्यादा रोजगार मिल रहे हैं। वहीं, सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि सरकारी नौकरी के लिए रोजगार कार्यालय में पंजीयन अनिवार्य कर दिया है। बाहरी व्यक्ति पंजीयन नहीं करा सकते हैं।

दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान भाजपा के यशपाल सिंह सिसौदिया ने सरकारी नौकरी में अधिकतम आयु सीमा का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अधिकतम आयु सीमा 27 से बढ़ाकर पहले 35 और अब 40 वर्ष कर दी है। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए अवसर कम हो जाएंगे। बाहरी युवाओं के लिए अधिकतम आयु सीमा को 27 ही रखा जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी गुमराह कर रहे हैें। उनका ही षड्यंत्र है कि बाहरी को ज्यादा मौके मिलें। इसका जवाब देते हुए सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि  अवमानना से बचने हाई कोर्ट के निर्देश पर सबके लिए आयु सीमा एक समान की गई है। मजबूरी में यह व्यवस्था करनी पड़ी है। इसके बावजूद प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार के मौके मिलें, इसके लिए रोजगार का पंजीयन अनिवार्य कर दिया है। बाहरी का पंजीयन नहीं हो सकता है।

सात माह में एक भी नौकरी दी हो तो नाम बताएं

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भागज़्व सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और कहा कि आप व मुख्यमंत्री भले ही कुछ भी कहें पर ऐसा नहीं लग नहीं रहा कि प्रदेश के युवाओं की चिंता की जा रही है। इस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने एक साथ खड़े होकर पिछली सरकार द्वारा कदम नहीं उठाने की बात कही, जिस पर काफ ी देर तक शोर-शराबा होता रहा। इसे लेकर नेता प्रतिपक्ष व जीएडी मंत्री के बीच तीखी नोंक-झोंक भी हुई। भार्गव ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार ने सात माह में सात व्यक्तियों को नौकरी दी हो तो नाम बताएं। आपका पाखंड नहीं चलेगा। मप्र के युवाओं के हितों को संरक्षित रखने के लिए हम यहां बैठे हैं। इसका जवाब देते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि आपकी सरकार के समय का फैसला है। 2018 से क्यों रोककर रखा था। सहकारिता में कई लोगों को निकालकर बाहर कर दिया था। हमने दोबारा रखा है। नीति भी बना रहे हैं और नौकरी भी देंगे। सदन में नेता प्रतिपक्ष जब अपनी बात रख रहे थे तो कुछ मंत्रियों ने टोका-टाकी की। इस पर भागज़्व ने आपा खोते हुए कहा कि ऐसा नहीं चलेगा। हमारी आवाज को दबाया जा रहा है। यदि ऐसे ही सदन चलाना है तो हम भी प्रति उत्तर देने के लिए तैयार हैं। सत्तापक्ष की तानाशाही नहीं चलेगी। पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी आपत्ति उठाते हुए कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष बात रख रहे हैं तो इस तरह हस्तक्षेप होगा, मंत्री हंगामा करेंगे तो कैसे चलेगा। राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बीच में टोकते हुए कहा कि 15 साल आपने जो किया, हम उसका ही अनुसरण कर रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने दोनों पक्षों को हिदायत देते हुए कहा कि मर्यादा का ध्यान रखें। सुंदरलाल पटवा और विक्रम वर्मा भी नेता प्रतिपक्ष थे, उन्हें याद करिए और अपनी बात रखें तो तीखी प्रतिक्रिया नहीं आएंगी।

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